देहरादून। हरक सिंह रावत के बाद अब पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र रावत की सियासी गलियारों में चर्चा है। पूर्व सीएम ने विधानसभा चुनाव ना लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने भाजपा के अध्यक्ष जे०पी०नड्डा को चिट्ठी लिखकर चुनाव ना लड़ने की बात कही है। पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र डोईवाला से विधायक हैं। वे यहां से तीसरी मर्तबा विधायक चुने गये। विधानसभा चुनाव के लिए यहां से उनकी चुनाव लड़ने की तैयारियां जोर-शोर चल रही थी। लेकिन टिकट बंटवारे से ऐन पहले चुनाव ना लड़ने के उनके इस फैसले से सियासी गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
बदली परिस्थितियों का दिया हवाला
पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हस्तलिखित चिट्ठी भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जे०पी०नड्डा को भेजी है। जिसमें उन्होंने कहा है बदली हुई परिस्थितियों के मद्देनजर उन्होंने ये फैसला लिया है। उन्होंने कहा की प्रदेश का नेतृत्व युवा हाथों में हैं। वे सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में पुनः युवा नेतृत्व की सरकार लाने के लिए काम करेंगे।
डोईवाला है भाजपा का मजबूत किला
डोईवाला विधानसभा भाजपा का मजबूत किला माना जाता है। पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत डोईवाला से तीन बार विधायक चुनकर आये हैं। एक उपचुनाव को छोड़ दे तो यहां अभी तक भाजपा पर ही यहां की जनता ने अपना भरोसा दिखाया है। हालांकि 2014 में निशंक के सांसद बनने के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ था जिसमें पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र कांग्रेस के उम्मीदवार हीरा सिंह बिष्ट से ये चुनाव हार गये थे।
तकरीबन चार साल रहे सीएम
प्रदेश में नारायण दत्त तिवारी के बाद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सबसे अधिक समय तक सीएम रहे। डोईवाला से जीत हासिल करने के बाद साल 2017 में उनकी सीएम पद पर ताजपोशी हुई। उन्होंने चार साल तक ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर सरकार चलाई। ट्रांसफर एक्ट लागू कर उन्होंने प्रदेश में ‘तबादला उद्योग’ को खत्म करने का काम किया। उन्होंने कई ऐसे फैसले लिये जो उत्तराखण्ड के विकास के लिए मील के पत्थर साबित होंगे। उनके देवस्थानम् बोर्ड के गठन का फैसला काफी विवादास्पद रहा।
चिट्ठी पर तरह-तरह की चर्चाएं
चुनावी मौसम में त्रिवेन्द्र की चिट्ठी चर्चा बटोर रही है। उनके समर्थक और विरोधी अपने-अपने तरीके से इसके मायने निकाल रहे हैं। विरोधियों का कहना है कि डोईवाला में उनके खिलाफ माहौल है। वहीं कुछ आलोचकों का कहना है कि हरक के डोईवाला से चुनाव में उतरने से त्रिवेन्द्र घबरा गये हैं। वहीं समर्थकों का कहना है कि त्रिवेन्द्र को संगठन में बड़ा ओहदा देने की तैयारी है।
