देहरादून। जीएनआईओटी संस्थान समूह मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति के माध्यम से सम्मानित करने का काम कर रहा है। साथ ही कोरोना काल में काल के गाल में समा चुके मेधावी बच्चो को छात्रवृत्ति प्रदान करेगा।यह जानकारी जीएनआईओटी संस्थान समूह समूह के चेयरमैन राजेश गुप्ता ने एक पत्रकार वार्ता में दी।
ग्रेटर नोएडा के इस समूह ने 12 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति देने की घोषणा भी की है। जीएनआईओटी संस्थान समूह का मानना है कि आर्थिक विपन्नता एक होनहार छात्र के लिए रोड़ा नहीं न हो। संस्थान मानना है कि उत्तराखण्ड की बौद्धिक प्रतिभा को उच्च शिक्षा के लिए समान अवसर दिया जाना चाहिए।
जीएनआईओटी का छात्रवृत्ति कार्यक्रम इस दिशा में सबसे व्यापक कार्यक्रमों में से एक है।संस्थान विभिन्न शैक्षणिक पाठ्यक्रमों जैसे पीजीडीएम, एमबीए, एमसीए, बीटेक, एमटेक, बीबीए, बीसीए, बीकाम, बीकाम (आनर्स), बीएससी (कम्प्यूटर साइंस), में छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए छात्रों से आवेदन आमंत्रित किया है।
संस्थान बी. टेक पाठ्यक्रम में प्रवेश चाहने वाले छात्रों को 12 वीं कक्षा और जेईई मेन में उनके प्रदर्शन के आधार पर छात्रवृत्ति की पेशकश की है। पीजीडीएम और एमबीए में प्रवेश चाहने वालों के लिए, छात्रों को स्रातक और कैट, मैट, जैट, गैट आदि में उनके प्रदर्शन के आधार पर छात्रवृत्ति दी जाएगी।
जीएनआईओटी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज द्वारा संचालित पीजीडीएम कोर्स, जीएनआईओटी संस्थान समूह का एक फ्लैगशिप प्रोग्राम है। इंडस्ट्री 4.0 की तर्ज पर इस कार्यक्रम को पीजीडीएम 4.0 नाम दिया गया है। कार्यक्रम का नाम ही पाठ्यक्रम के बारे में बहुत कुछ बताता है इस कोर्स में 10 से अधिक कौशल विकास प्रशिक्षण एवं प्रमाणन, गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम और चाणक्य टॉक सीरीज़ कुछ मुख्य आधार है।
आज की आवश्यकता के अनुसार पाठ्यक्रम को इस प्रकार विकसित किया गया है जो युवा प्रबंधकों को व्यवसाय प्रबंधन के अलावा उद्यमिता हेतु प्रेरित कर तैयार करता है, इस दिशा में संस्थान ने अटल इनक्यूबेशन सेंटर, बिमटेक के साथ समझौता किया है, जिसमें भारत सरकार द्वारा नए उद्यमी तैयार किये जाते हैं।
इस संस्थान में वैश्विक ड्ट एक्सपोजर को बढ़ावा देने के लिए एआईबीपीएम, इंडोनेशिया के साथ समझौता किया है जिसके माध्यम से युवा प्रबंधकों को वैश्विक रोजगार हेतु तैयार किया जाता है, एआईबीपीएम, इंडोनेशिया का नुसत्रा प्रोजेक्ट छात्रों को विभिन्न संस्कृतियों, देशों और शहरों के छात्रों के साथ मिलकर काम करने का मौका देती है।
संस्थान में हायर लर्निंग एक्रिडिटेशन कंसल्टेंट एंड ट्रेनिंग, लंदन ने संस्थान की गुणवत्ता के आधार पर प्रमाणित करते हुए अपनी सदस्यता प्रदान की है, यह संस्थान इस प्रमाणन को प्राप्त करने वाला उत्तर भारत का इकलौता संस्थान है। इस प्रमाणन से संस्थान अब वैश्विक विशेषज्ञता प्रदान करने के लिए किसी भी विदेशी प्रबंधन संस्थान के साथ करार कर सकता है।
डॉ. अरुण कुमार सिंह, निदेशक जीएनआईओटी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज ने कहा कि, “गुणवत्ता पर ध्यान देना शुरू से ही जीएनआईओटी समूह की पहचान रहा है। शिक्षा क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर सर्वाेत्तम प्रयासों को आधार मानकर पाठ्यक्रम आधारित संस्थान ही लंबे समय तक जीवित रहेंगे।
डॉ. सिंह ने इंडस्ट्री 4.0 आधारित पीजीडीएम 4.0 पर जोर देते हुए कहा कि संस्थान अपने छात्रों को इंटर्नशिप और प्रशिक्षण के माध्यम से उपयुक्त कौशल और व्यावहारिक अनुभव देकर तैयार करता है।
जीएनआईओटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन राजेश कुमार गुप्ता ने कहा कि प्रतिभाशाली छात्रों के लिए पैसा एक रोड ब्लॉक नहीं होना चाहिए। हम मेधावी छात्रों, सशस्त्र बलों के बच्चों और कोविड मृतक आश्रितों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों और क्षमता के आधार पर विभिन्न छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रत्येक योग्य छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।
