देहरादून। पूरे प्रदेश में हर गली और चौबारे में राजनीति की चर्चा हैं। आने वाले साल की शुरूआत में यहां विधानसभा चुनाव होने हैं। पांच साल बाद फिर यहां की जनता अपने लिए पांचवी दफा सरकार का चुनाव करेगी। राज्य में भाजपा और कांग्रेस में बड़ा मुकाबला है। आम आदमी पार्टी भी यहां पहली बार सियासी मैदान में अपना भाग्य आजमा रही हैं। वहीं उत्तराखण्ड का एक मात्र क्षेत्रीय दल उत्तराखण्ड क्रांति दल भी चुनाव मैदान में हैं।
सियासी दलों की रैलियां राजनीतिक चर्चाओं को और हवा देने का काम करती है। बीते 4 दिसम्बर को देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउण्ड में प्रधानमंत्री की रैली हुई। भाजपाईयों और समर्थकों में चर्चा है कि मोदी की ये रैली ‘मैजिक’ का काम करेगी और एक बार फिर भाजपा सत्ता में वापिसी कर इतिहास रचेगी।
वहीं विरोधी दल कांग्रेस का दावा है कि ‘मोदी ‘मैजिक’ खत्म हो चुका है। ‘डबल इंजन’ धुंआ छोड़ने लगा है। भाजपा के तीन-तीन ड्राइवर (मुख्यमंत्री) भी डबल इंजन को आगे सरकाने में भी नाकाम साबित हुए हैं। प्रदेश सरकार खनन माफियाओं के इशारे पर चल रही है।
चर्चाओं को हवा देते वोटर सर्वे
प्रदेश में राजनीतिक पारा कुलांचे भर रहा है। राजनैतिक दलों के उम्मीदवारों की चर्चा है, उनके हार-जीत की चर्चाएं है। साथ ही उनके इतिहास-भूगोल की भी चर्चाएं तेज हो चली हैं। चुनावी सर्वे करने वाली एजेंसियों सर्वे में मशगूल है। अजब-गजब सर्वे हो रहे हैं। इन सर्वे की माने तो कांग्रेस नेता हरीश रावत प्रदेश के अवाम की सीएम के तौर पर पहली पसंद हैं। लेकिन भाजपा को बहुमत मिल रहा है। तो दूसरे सर्वे कहते है इस बार प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा में कड़ा मुकाबला होगा। कुल मिलाकर हर जगह चर्चा ही चर्चा है।
सदन में नहीं हुई कोई चर्चा
चुनावी मोड़ में खड़े प्रदेश में अभी-अभी शीतकालीन विधानसभा सत्र हुआ है। इस विधान सत्र को लेकर बड़ी बहस और चर्चाएं रही। सत्ताधारी दल ने पहले विस का सत्र प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण में कराने का फैसला लिया। फिर अपने ही फैसले को पलटते हुए देहरादून में ही सत्र कराने का फैसला लिया। विपक्ष ने भी इस मौके को लपका और सत्ताधारियों पर गैरसैण के बहाने पहाड़विरोधी होने की तोहमत लगा डाली।
विस सत्र को लेकर बाहर खूब चर्चा और राजनीति हुई लेकिन सदन के अंदर सत्र बिना चर्चा के समाप्त हो गया। मीडिया के हवाले से जानकारी है कि सदन में बिना चर्चा के विधेयक पास हो गये।
चर्चा में सीएम के पीआरओ
चुनावी मोड़ में सीएम पुष्कर सिंह धामी के पीआरओ नंदन सिंह बिष्ट भी इन चर्चाओं के बीच मैदान मार ले गये। सोशल मीडिया से लेकर गांव-गली, नुक्कड़ और सरकारी दफ्तरों में पीआरओ के इस कारस्तानी की ही चर्चाएं हैं। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक सीएम कार्यालय में तैनात पीआरओ नंदन सिंह बिष्ट ने बागेश्वर के पुलिस कप्तान को खनन माफिआयों के चालान माफ करने को लेकर चिट्ठी भेजी। सोशल मीडिया में तैर रहीं इस चिट्ठी को विपक्षियों ने हाथों हाथ लपका और इसे सीएम पुष्कर सिंह धामी को टारगेट कर चुनावी मुद्दा बना दिया। हालांकि पीआरओ को निलम्बित कर दिया गया है लेकिन प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चाएं गरम हैं।

