देहरादून। गढ़वाल मण्डल की वीआईपी सीट में शुमार श्रीनगर विधानसभा प्रदेश के दो दिग्गजों का सियासी इम्तिहान लेगी। यहां मौजूदा विधायक और कैबिनेट मंत्री डा० धन सिंह रावत पर अपनी सीट बचाए रखने की चुनौती है। तो साल 2017 की मोदी लहर में सीट गवां बैठे पूर्व विधायक खुद को दोबारा साबित करना है।
धन सिंह रावत भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री है तो गोदियाल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं। इस नाते राजनीतिक पण्डितों की निगाहें श्रीनगर सीट पर जमी हुई है। यूकेडी के टिकट पर चुनाव लड़ने जा रहे मोहन सिंह काला भी इस लड़ाई को दिलचस्प बना रहे है।
हालांकि अब तक भाजपा और कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर श्रीनगर सीट से अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किये है, लेकिन यह तय माना जा रहा है कि भाजपा से धन सिंह और कांग्रेस से गणेश गोदियाल ही यहां मैदान में आमने-सामने होंगे। श्रीनगर सीट का नतीजा जहां कांग्रेस-भाजपा दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण होगा, वहीं धन सिंह और गोदियाल का राजनीतिक भविष्य भी तय करेगा।
कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत की बात करें तो उन्हें भाजपा में संगठनात्मक रूप से कद्दावर माना जाता है। वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद गोदियाल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं में शामिल हो चुके है।
श्रीनगर सीट की बात करें ये तो साल 2012 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। जहां पहली दफा धन सिंह रावत और गणेश गोदियाल का राजनीतिक मैदान में आमना-सामना हुआ। लेकिन 2012 में कांग्रेस के गणेश गोदियाल मैदान मार ले गये और डा० धन सिंह रावत को शिकस्त मिली। फिर साल 2017 में दूसरी दफा धन सिंह रावत और गणेश गोदियाल फिर श्रीनगर के मैदान में उतरे लेकिन इस बार प्रचण्ड मोदी लहर के बलबूते डा० धन सिंह रावत पहली दफा विधानसभा पहुंचने में कामयाब हुए। और पहली ही दफा राज्यमंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्री बने।

